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अलबेला अनमोल पूत

24 Apr

आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत को
जिसने पूरे विश्व में नाम कमाया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
उसे जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

परेशानी , दुःख और गरीबी में जो जन्मा था
वही भारत माता का स्वाभिमान ले के आया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत को
जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

जिसने जीवन भर शिक्षित बनो , संगठित रहो ,
संघर्ष करो का सन्देश फैलाया था
जिसने दलित भाई, पुस्तकों और
भारत देश पर असीम प्रेम लुटाया था
जो भारत की खोई आन -बान ले के आया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत को
जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

कर्तव्य परायणता , ईमानदारी , मेहनत, लगन और अथाह ज्ञान का सागर
जिसने पूरे विश्व में अपने ज्ञान का लोहा मनवाया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत को
जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

दलितों और अस्पर्शयों के
राजनीतिक, सामाजिक , धार्मिक अधिकारों के लिए
संघर्ष करते-करते जिसने अपना सारा जीवन बिताया था
जो लोकतन्त्र वाला यश-गान ले के आया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत को
जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

सारी मानव जाती के अस्तित्व के संघर्ष के लिए समर्पित
राजनेता , उत्कृष्ट समाज सेवी, चिन्तक, तेजस्वी वक्ता
कानून विशेषज्ञ, विख्यात अर्थशास्त्री और इन सब से
बढ़कर एक प्रखर राष्ट्रभक्त
भारत रत्न ,
जो बाबा साहिब कहलाया था
आज मैं शत् शत् नमन करता हूँ
भारत माता के अलबेले अनमोल पूत
बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को
जो भारत के लिए संविधान ले के आया था

{संजय कुमार फरवाहा }

 
4 Comments

Posted by on April 24, 2011 in कविता

 

4 responses to “अलबेला अनमोल पूत

  1. suresh

    January 14, 2012 at 4:44 am

    jai bjim

     
  2. SANJAY PATIL TIT COLLEGE (2008) me-2 BHOPAL (NEW AUTHER)

    April 21, 2012 at 3:05 am

    SANJAY PATIL TIT COLLEGE BHOPAL. Shayad ye kavita DR. BABA SAHEB AMBEDKER JI ke jiven ki gahrai aur chintan ka sakshatkar karati hai. AAj bhi ma dharti apne priy sapoot ke liye onsa ki bundo ke roop me apne aanshu bahati hai. Jane kaha kho gaye DR. AMBEDKER JI jinke bina hamare jivan me ek soonapan sa chhane laga hai. kabhi unke jayanti ke din me unki yadon me jane kab man foot foot kar apne aap hi rone lagta hai DHANYA hai ham BHARATVASI jinke jeevan me ambedker ji ka ASTITVA maujood hai . JAI BHIM.

     
  3. Dr.Jogendra Kumar

    May 23, 2012 at 4:13 am

    Dr. Jogendra Kumar,Faculty of CSSEIP, BBA University Lucknow Aapaki ye kavita DR. BABA SAHEB AMBEDKER JI ke jiven ki gahrai aur chintan ka sakshatkar karati hai. AAj bhi ma dharti apne priy sapoot ke liye onsa ki bundo ke roop me apne aanshu bahati hai. Jane kaha kho gaye DR. AMBEDKER JI jinke bina hamare jivan me ek soonapan sa chhane laga hai. kabhi unke jayanti ke din/parinirwan ke din unki yadon me gamgeen ho jata . Jai Bhim.

     
  4. Pravin.s.Gaikwad

    March 9, 2013 at 6:41 am

    bohta kam log hai aap ki tarha sochanewale i like ur thought

     

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