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भारतीय संविधान के सूत्रधार बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की 120 वीं जयंती पर हार्दिक श्रधा सुमन

30 Apr

भारतीय संविधान के सूत्रधार बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की 120 वीं जयंती पर हार्दिक श्रधा सुमन

डॉ. भीमराव आम्बेडकर
जन्म : 14 अप्रैल, 1893मृत्यु : 6 दिसम्बर, 1956हम हैं दरियाहमें अपना हुनर मालूम है,जिस तरफ निकल जाएँगे,वहीं रास्ता बना लेंगे।
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WDयही उक्ति डॉ. भीमराव आम्बेडकर के जीवन संघर्ष का प्रतीक है। वे अनन्य कोटि के नेता थे, जिन्होंने अपना समस्त जीवन समग्र भारत की कल्याण कामना में उत्सर्ग कर दिया। खासकर भारत के 80 फीसदी दलित सामाजिक व आर्थिक तौर से अभिशप्त थे, उन्हें अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही डॉ. आम्बेडकर का जीवन संकल्प था।चौदह अप्रैल 1891 को महू में सूबेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की चौदहवीं संतान के रूप में डॉ. भीमराव आम्बेडकर का जन्म हुआ। उनके व्यक्तित्व में स्मरण शक्ति की प्रखरता, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सच्चाई, नियमितता, दृढ़ता, प्रचंड संग्रामी स्वभाव का मणिकांचन मेल था। संयोगवश भीमराव सातारा गाँव के एक ब्राह्मण शिक्षक को बेहद पसंद आया। वे अत्याचार और लाँछन की तेज धूप में टुकड़ा भर बादल की तरह भीम के लिए माँ के आँचल की छाँव बन गए। बाबा साहब ने कहा- वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जातिविहीन करना होगा। समाजवाद के बिना दलित-मेहनती इंसानों की आर्थिक मुक्ति संभव नहीं।डॉ. आम्बेडकर की रणभेरी गूँज उठी, ‘समाज को श्रेणीविहीन और वर्णविहीन करना होगा क्योंकि श्रेणी ने इंसान को दरिद्र और वर्ण ने इंसान को दलित बना दिया। जिनके पास कुछ भी नहीं है, वे लोग दरिद्र माने गए और जो लोग कुछ भी नहीं है वे दलित समझे जाते थे।’बाबा साहेब ने संघर्ष का बिगुल बजाकर आह्वान किया, ‘छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करना होता है।’ उन्होंने ने कहा है, ‘हिन्दुत्व की गौरव वृद्धि में वशिष्ठ जैसे ब्राह्मण, राम जैसे क्षत्रिय, हर्ष की तरह वैश्य और तुकाराम जैसे शूद्र लोगों ने अपनी साधना का प्रतिफल जोड़ा है। उनका हिन्दुत्व दीवारों में घिरा हुआ नहीं है, बल्कि ग्रहिष्णु, सहिष्णु व चलिष्णु है।’बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने भीमराव आम्बेडकर को मेधावी छात्र के नाते छात्रवृत्ति देकर 1913 में विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया। अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, दर्शन और अर्थ नीति का गहन अध्ययन बाबा साहेब ने किया। वहाँ पर भारतीय समाज का अभिशाप और जन्मसूत्र से प्राप्त अस्पृश्यता की कालिख नहीं थी। इसलिए उन्होंने अमेरिका में एक नईदुनिया के दर्शन किए। डॉ. आम्बेडकर ने अमेरिका में एक सेमिनार में ‘भारतीय जाति विभाजन’ पर अपना मशहूर शोध-पत्र पढ़ा, जिसमें उनके व्यक्तित्व की सर्वत्र प्रशंसा हुई।डॉ. आम्बेडकर के अलावा भारतीय संविधान की रचना हेतु कोई अन्य विशेषज्ञ भारत में नहीं था। अतः सर्वसम्मति से डॉ. आम्बेडकर को संविधान सभा की प्रारूपण समिति का अध्यक्ष चुना गया। 26 नवंबर 1949 को डॉ. आम्बेडकर द्वारा रचित (315 अनुच्छेद का) संविधान पारित किया गया।डॉ. आम्बेडकर का लक्ष्य था- ‘सामाजिक असमानता दूर करके दलितों के मानवाधिकार की प्रतिष्ठा करना।’ डॉ. आम्बेडकर ने गहन-गंभीर आवाज में सावधान किया था, ’26 जनवरी 1950 को हम परस्पर विरोधी जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक क्षेत्र में समानता रहेगी किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता रहेगी। जल्द से जल्द हमें इस परस्पर विरोधता को दूर करना होगी। वर्ना जो असमानता के शिकार होंगे, वे इस राजनीतिक गणतंत्र के ढाँचे को उड़ा देंगे।’बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर एक मनीषी, योद्धा, नायक, विद्वान, दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाजसेवी एवं धैर्यवान व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा अनुकरणीय है।

 

2 responses to “भारतीय संविधान के सूत्रधार बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की 120 वीं जयंती पर हार्दिक श्रधा सुमन

  1. karan kumar nayak

    February 7, 2012 at 4:52 pm

    baba shaheb hi dalito ke bhagwan h ……

     
  2. vijay

    May 19, 2012 at 7:00 am

    babasaheb was very powerfull politician in indian histroy he was not politicion but social worker .

     

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